स्वतंत्रता दिवस पर साहित्य-संस्कृति का भव्य आयोजन, ‘स्वर्ग से प्रिय जन्मभूमि’ में जुटे 300 से अधिक लेखक-कलाकार

कलकाता: स्वतंत्रता के 80वें वर्ष के अवसर पर बार्ता और मनन की ओर से आयोजित दूसरे वर्ष का विशेष साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘स्वर्ग से प्रिय जन्मभूमि’ 15 अगस्त को बीरेंद्र मंच में भव्य रूप से संपन्न हुआ। करीब आठ घंटे तक चले इस आयोजन में 300 से अधिक लेखक और कलाकारों ने हिस्सा लिया। कविता पाठ, आवृत्ति, नृत्य और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे कार्यक्रम को देशभक्ति, साहित्य और संस्कृति के रंग में रंग दिया।

कार्यक्रम के मुख्य प्रवेश द्वार पर ‘लेखन की स्वतंत्रता’ शीर्षक से विशेष दीवार पत्रिका प्रदर्शित की गई। आयोजन के दौरान साहित्य और प्रकाशन जगत से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन भी हुआ। इनमें द वुमन का दूसरा अंक, भारतमंत्र, कथनिका, साप्ताहिक मनन और वर्णबहार प्रमुख रहे।

इस अवसर पर मनन प्रकाशन की 87 पुस्तकों का सामूहिक लोकार्पण किया गया। साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नेशनल बुक ट्रस्ट और ‘हर घर तिरंगा’ के सहयोग से आयोजित 12 दिवसीय स्वदेश चेतना लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रतियोगिता में कुल 57 लेखक शामिल हुए थे।

कार्यक्रम में साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 19 साहित्यकारों को ‘भारत मंत्र सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के साथ पुस्तकों के लोकार्पण ने कार्यक्रम को साहित्य जगत के लिए खास बना दिया।

आयोजकों ने कार्यक्रम की सफलता के लिए पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार सुब्रत गुप्ता के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उनकी ओर से प्रतिनिधि के माध्यम से शुभकामना संदेश भी कार्यक्रम तक पहुंचाया गया।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखक डॉ. सुराशिस माइती उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखक डॉ. सुराशिस माइती उपस्थित रहे। उन्होंने सम्मान प्रदान करने के साथ लेखकों की पुस्तकों का लोकार्पण भी किया।

कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा दर्शकों का उत्साह। पांच सौ से अधिक दर्शकों की क्षमता वाले बीरेंद्र मंच में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और संस्कृति-प्रेमी उपस्थित रहे। आयोजकों के अनुसार, दर्शकों की यह उपस्थिति पूरे आयोजन के प्रति लोगों की रुचि और विश्वास को दर्शाती है।

आयोजन को सफल बनाने में पूरी टीम की भूमिका को भी विशेष रूप से सराहा गया। संपादक सायंती, आह्वायक अंशुमान घोष सहित दृशा, सुवर्ण, तमसा, शानु, प्रीतम, शाश्वत, सौम्यदीप, अंकिता हलदार, अंकिता सरकार, सुनम, तानिया चटर्जी, तानिया पोल्ले, आकाश घोष, सृजन और पापड़ी ने आयोजन की तैयारियों और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आयोजकों ने बताया कि अब अगली बड़ी तैयारी दिघा में प्रस्तावित ‘Bengal Lit Fusion Meet 2026’ को लेकर शुरू हो चुकी है। साहित्य, संस्कृति और कला को एक मंच पर लाने की इस पहल को आगे और व्यापक बनाने की तैयारी की जा रही है।

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